Monday, 20 June 2011

लड़की बचाओ इज्ज़त बचाओ

सदी के महा नायक कहे जाने वाले बिग बी याने अमिताभ बच्चन ने लड़कियों को बराबरी का दर्जा देने की वकालत की है. उन्होंने यह तर्क दिया कि बेटियां बेशक पराया धन हैं लेकिन उनकी परवरिश और उनके करियर को लेकर पैरेंट्स में वही चिन्ता होनी चाहिए ,जो बेटे को लेकर  होती है  . उन्होंने अपनी बेटी श्वेता के बारे में भी यही कहा कि उन्होंने अभिषेक और श्वेता में कोई फर्क नहीं समझा और दोनों को एक जैसा प्यार दिया है . बिग बी कि यह वकालत अच्छी बात है .
वैसे बदलते वक़्त में अब बेटी और बेटे में कोई ज्यादा फर्क नहीं किया जा रहा है बल्कि हजारो एक्साम्पल ऐसे हैं जहा बेटों से बढकर बेटियां हैं पैरेंट्स भी सीना तानकर  बोलते हैं उनकी बेटी बेमिसाल है .यह फर्क सिर्फ उसी समाज में बचा है , जहाँ गरीबी अधीक हो ... बेटियों का महत्व बढ़  रहा है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है है कि तमाम लोग ऐसे हैं , जिनकी एक मात्र संतान बेटी है . दो बेटी वाले फॅमिली भी काफी ज्यादा हैं . इसलिये अब बेटा और बेटी जैसी बहस आ गयी . लेकिन एक और बड़ा सवाल "सुरसा" कि तरहा मुह  फैला खड़ा पड़ा ही , उसका जवाब सोसाइटी को देना ही होगा . पैरेंट्स के लिए जहाँ बेटा और बेटी का फर्क घटता  जा रहा है , वहीँ  सोसाइटी की मेंटालिटी में यह डिस्टेंस बढ़ने लगी है . अगर ऐसा न होता तो शायद इतनी तेज़ी से लडकिया के साथ क्राइम की वारदाते न ज्यादा होतीं ..पिछले दस साल के क्राइम ग्राफ में लड़कियां -महिलाओं के साथ रेप ,मर्डर , तेज़ाब से जलाने जैसी घटनायो का  इजाफा हुआ है .
जितनी तेज़ी से लड़कियों की सोच बदल रही है उतने ही तेज़ी से उन पर होने वाले अपराधो की शक्ल भी बदल रहे है . कभी पुलिस स्टेशन में , तो कभी नेता जी के बंगले पैर और कभी भरे बाज़ार  से उठाकर लड़की के साथ रेप  किया जा रहा है  इतना ही नहीं उसकी आवाज़ को भी हमेशा के लिए खामोश किया जा रहा है . ज़रूरत है तो सोसाइटी की लड़कियों के प्रति इसी कूर सोच को बदलने की है . बेटा-बेटी के बीच तो फर्क का घट ही गया है क्या युवक और युवती के बीच का अंतर भी घट पायेगा .
इन सवालों के उत्तर के लिए बिग बी ही नहीं सोसाइटी के तमाम महानायक को सामने होगा और पहल करनी होगी to save girl to save honour

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